Friday, October 24, 2008

उम्मीद वो प्यास हैं जो बुझती नही




दरिया किनारे मैं प्यासा खड़ा था



बीत गई रैना सारी ,बुझी न प्यास हमारी



प्यास जो बुझ गई होती



तो ये जिन्दगी ना फ़िर जिन्दगी होती