दरिया किनारे मैं प्यासा खड़ा था
बीत गई रैना सारी ,बुझी न प्यास हमारी
प्यास जो बुझ गई होती
तो ये जिन्दगी ना फ़िर जिन्दगी होती
देवेंदर।ये मुसोलिनी का नहीं चे गुवेरा का है.ठीक है तू बोलता है तो देशभक्त पर भी लिखूंगा।ब्लॉग तो अच्छा है । लिखते रहा करो। सप्रेम ..गजेन्द्र सिंह भाटी
Post a Comment
1 comment:
देवेंदर।
ये मुसोलिनी का नहीं चे गुवेरा का है.ठीक है तू बोलता है तो देशभक्त पर भी लिखूंगा।
ब्लॉग तो अच्छा है । लिखते रहा करो।
सप्रेम ..गजेन्द्र सिंह भाटी
Post a Comment